Transliteration
From सर्वज्ञ
ट्रांसलिट्रेशन अर्थात लिप्यांतरण का अर्थ है एक लिपि में लिखे टैक्स्ट को से दूसरी लिपि में बदलना। यद्यपि यह एक व्यापक विषय है लेकिन इस लेख में हम केवल इलैक्ट्रॉनिक टैक्स्ट के लिप्यांतरण के संदर्भ में बात करेंगे। विभिन्न औजारों की सहायता से एक भाषा की लिपि में लिखे गए टैक्स्ट को दूसरी भाषा की लिपि में बदला जाता है। यह 'ट्रांसलेशन' (अनुवाद) से भिन्न है जिसमें कि अर्थ कायम रखते हुए भाषा भी बदलती है। दूसरी ओर ट्रांसलिट्रेशन में केवल लिपि बदलती है, अर्थ नहीं।
ट्रांसलिट्रेशन का एक प्रचलित उपयोग है कंप्यूटर के इंग्लिश कीबोर्ड का उपयोग करके अन्य भाषाओं में लिखना जो कि एक भिन्न लिपि तथा वर्णमाला का उपयोग करती हो, उदाहरण के लिए हिन्दी आदि भारतीय भाषाएं, चीनी तथा रुसी भाषाएं आदि।
ट्रांसलिट्रेशन आधारित टाइपिंग औजारों में प्रीप्रोसैसर होता है। टाइपकर्ता रोमन अक्षरों में लिखता है और प्रीप्रोसैसर उन्हें देवनागरी में प्रदर्शित करता है। इसके लिए एक भाषा में लिखे जाने वाले शब्दों के लिए दूसरी भाषा (इंग्लिश) में कुंजियाँ (Key Combination) निर्धारित की जाती हैं। इस निर्धारण पद्धति को ट्रांसलिट्रेशन स्कीम या ट्रांसलिट्रेशन रुल्स कहा जाता है।
देवनागरी टैक्स्ट की विभिन्न ट्रांसलिट्रेशन विधियों के बारे में आप यहाँ पढ़ सकते हैं। देवनागरी इलैक्ट्रॉनिक टैक्स्ट के लिए IAST, Harvard-Kyoto तथा ITRANS आदि लिप्यांतरण पद्धतियाँ हैं। इनमें से अधिकतर ITRANS पद्धति का हिन्दी टाइपिंग हेतु उपयोग किया गया।
कंप्यूटर पर इंग्लिश कीबोर्ड द्वारा हिन्दी लिखने हेतु निम्न कुछ ट्रांसलिट्रेशन पद्धतियाँ प्रचलित हैं:
- RTS
- WX
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[edit] RTS
RTS (Rice Transliteration Scheme अथवा Rice Transliteration Standard)। यह राइस यूनिवर्सिटी के कुछ छात्रों द्वारा बनाया गया था, इसे मूल रुप से तेलगू के लिए लिखा गया था।
यह वर्तमान में प्रचलित फोनेटिक ट्रांसलिट्रेशन पद्धतियों से सर्वाधिक मिलती है। तेलगू लिपि में RTS के प्रयोग बारे यहाँ पढ़ें।
[edit] WX
WX दोनों अक्षरों का प्रयोग अंग्रेजी में बहुत कम होता है। अतः 'त', 'थ', 'द', 'ध' को इनके द्वारा प्रकट किया गया, अतः इस ट्रांसलिट्रेशन स्कीम का नाम WX रखा गया।
WX एक रोमन ट्रांसलिट्रेशन स्कीम है जिसमें 't', 'd' का प्रयोग Retroflexes (ट, ड) को Transcribe करने में तथा 'w', 'x' का प्रयोग Dental Stops (त, द) के लिए होता है।
यदि T तथा D का प्रयोग Voiceless तथा Voiced Retroflex Stops और t तथा d का प्रयोग Dentals के लिए किया जाए तो इसे TD-Notation कहते हैं।
यह दो प्रकार की होती है: WX - Syllablic और WX - Aalphabetic.
[edit] WX - Syllablic
सामान्यतया प्राचीन पद्धति के लोग इनपुट के लिए इसे इस्तेमाल करते हैं। इसमें हलन्त का प्रयोग करना पड़ता है।
[edit] WX - Aalphabetic
इसका प्रयोग Indic NLP Data के कम्प्यूटर पर आन्तरिक संसाधन, Sorting, Indexing, Morphing, Analysing आदि के लिए किया जाता है।
[edit] संबन्धित कड़ियाँ
- इंग्लिश विकिपीडिया पर ट्रांसलिट्रेशन
- ट्रांसलिट्रेशन की एक प्रचलित विधि - फोनेटिक
- इंग्लिश विकीपीडिया - देवनागरी ट्रांसलिट्रेशन
