स्वाध्याय

From सर्वज्ञ

स्वाध्यायात मा प्रमद । ( स्वाध्याय से प्रमाद ( आलस ) मत करो । )

अध्ययन हमें आनन्द तो प्रदान करता ही है, अलंकृत भी करता है और योग्य भी बनाता है.

मस्तिष्क के लिये अध्ययन की उतनी ही आवश्यकता है जितनी शरीर के लिये व्यायाम की । — जोसेफ एडिशन

पढने से सस्ता कोई मनोरंजन नहीं ; न ही कोई खुशी , उतनी स्थायी । — जोसेफ एडिशन

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