मीठी बोली

From सर्वज्ञ

तुलसी मीठे बचन तें , सुख उपजत चहुँ ओर ।

वशीकरण इक मंत्र है , परिहहुँ बचन कठोर ॥

ऐसी बानी बोलिये , मन का आपा खोय । औरन को शीतल लगे , आपहुँ शीतल होय ॥ — कबीरदास

मधुर वचन है औषधि , कटुक वचन है तीर । श्रवण मार्ग ह्वै संचरै , शाले सकल शरीर ॥ — कबीरदास

प्रियवाक्य प्रदानेन सर्वे तुष्यन्ति जन्तवः । तस्मात् तदेव वक्तव्यं , वचने का दरिद्रता ॥ ( प्रिय वाणी बोलने से सभी जन्तु खुश हो जाते है । इसलिये मीठी वाणी ही बोलनी चाहिये , वाणी में क्या दरिद्रता ? )

नम्रता और मीठे वचन ही मनुष्य के सच्चे आभूषण होते हैं | -– तिरूवल्लुवर

नरम शब्दों से सख्त दिलों को जीता जा सकता है | – सुकरात

अप्रिय शब्द पशुओं को भी नहीं सुहाते हैं | -– बुद्ध

खीरा सिर ते काटिये , मलियत लौन लगाय । रहिमन करुवे मुखन को , चहिये यही सजाय ॥

कडी बात भी हंसकर कही जाय तो मीथी हो जाती है । — प्रेमचन्द

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