भाग्य

From सर्वज्ञ

आपका आज का पुरुषार्थ आपका कल का भाग्य है | -– पालशिरू

दुनिया में कोई भी व्यक्ति वस्तुतः भाग्यवादी नहीं है, क्योंकि मैंने एक भी ऐसा आदमी नहीं देखा, जो अपने घर में आग लगने की बात जान कर भी निश्चित बैठा रहे। - जे.बी. एस. हॉल्डेन

कादर मन कँह एक अधारा। दैव दैव आलसी पुकारा।। ——गोस्वामी तुलसीदास

हर इक बदनसीबी आने वाले कल की खुशनसीबी का बीज लेकर आती है . — ओग मेनडिनो

भाग्य के भरोसे बैठे रहने पर भाग्य सोया रहता है पर हिम्मत बांध कर खड़े होने पर भाग्य भी उठ खड़ा होता है । -अज्ञात

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