भविष्य

From सर्वज्ञ

अनागतविधाता च प्रत्युत्पन्नमतिस्तथा । द्वावेतो सुखमेधते , यदभविष्यो विनश्यति ॥ — पंचतन्त्र भविष्य का निर्माण करने वाला और प्रत्युत्पन्नमति ( हाजिर जबाब ) ये दोनो सुख भोगते हैं । “जैसा होना होगा , होगा” ऐसा सोचने वाले का विनाश हो जाता है ।

भविष्य के बारे में पूर्वकथन का सबसे अच्छा तरीका भविष्य का निर्माण करना है । — डा. शाकली

किसी भी व्यक्ति का अतीत जैसा भी हो , भविष्य सदैव बेदाग होता है। — जान राइस

तुलसी जसि भवतव्यता तैसी मिलै सहाय। आपु न आवै ताहिं पै ताहिं तहाँ लै जाय।। —–गोस्वामी तुलसीदास

करमगति टारे नाहिं रे टरी । —–सन्त कबीर

होनवार बिरवान के होत चीकने पात। —–अज्ञात

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