पण्डित
From सर्वज्ञ
झटिति पराशयवेदिनो हि विज्ञाः । ( जो झट से दूसरे का आशय जान ले वही बुद्धिमान है । )
सुख दुख या संसार में , सब काहू को होय । ज्ञानी काटै ज्ञान से , मूरख काटै रोय ॥
आत्मवत सर्वभूतेषु यः पश्यति सः पण्डितः । ( जो सारे प्राणियों को अपने समान देखता है , वही पण्डित है । )
ज्ञानी आदमी के खोखले ज्ञान से सावधान, वह अज्ञान से भी ज्यादा खतरनाक है। - बर्नारड शा
सब तै भले बिमूढ़, जिन्हैं न ब्यापै जगत गति ——-गोस्वामी तुलसीदास
जाकी जैसी बुद्धि है , वैसी कहे बनाय । उसको बुरा न मानिये , बुद्धि कहाँ से लाय ॥ — रहीम
सर्दी-गर्मी, भय-अनुराग, सम्पती अथवा दरिद्रता ये जिसके कार्यो मे बाधा नही डालते वही ज्ञानवान (विवेकशील) कहलाता है ।
सबसे अधिक ज्ञानी वही है जो अपनी कमियों को समझकर उनका सुधार कर सकता हो। -अज्ञात
बिना कारण कलह कर बैठना मूर्ख का लक्षण हैं। इसलिए बुद्धिमत्ता इसी में है कि अपनी हानि सह ले लेकिन विवाद न करे । –हितोपदेश
