गरिबी और श्रीमंती

From सर्वज्ञ

(धनी से भेजा गया)

गरीब वह है जिसकी अभिलाषायें बढी हुई हैं । — डेनियल

गरीबों के बहुत से बच्चे होते हैं , अमीरों के सम्बन्धी. -– एनॉन

पैसे की कमी समस्त बुराईयों की जड़ है।

कुबेर भी यदि आय से अधिक व्यय करे तो निर्धन हो जाता है | – चाणक्य

निर्धनता से मनुष्य मे लज्जा आती है । लज्जा से आदमी तेजहीन हो जाता है । निस्तेज मनुष्य का समाज तिरस्कार करता है । तिरष्कृत मनुष्य में वैराग्य भाव उत्पन्न हो जाते हैं और तब मनुष्य को शोक होने लगता है । जब मनुष्य शोकातुर होता है तो उसकी बुद्धि क्षीण होने लगती है और बुद्धिहीन मनुष्य का सर्वनाश हो जाता है । — वासवदत्ता , मृच्छकटिकम में

गरीबी दैवी अभिशाप नहीं बल्कि मानवरचित षडयन्त्र है । — महात्मा गाँधी

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