इच्छा

From सर्वज्ञ

मनुष्य की इच्छाओं का पेट आज तक कोई नहीं भर सका है | – वेदव्यास

इच्छा ही सब दुःखों का मूल है | -– बुद्ध

भ्रमरकुल आर्यवन में ऐसे ही कार्य (मधुपान की चाह) के बिना नहीं घूमता है। क्या बिना अग्नि के धुएं की शिखा कभी दिखाई देती है? - गाथासप्तशती

स्वप्न वही देखना चाहिए, जो पूरा हो सके । –आचार्य तुलसी

माया मरी न मन मरा , मर मर गये शरीर । आशा तृष्ना ना मरी , कह गये दास कबीर ॥ — कबीर

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