नारद उवाच

Monday, June 18, 2007

तकनीकी समस्या

एक तकनीकी समस्या के चलते आज (भारतीय समयानुसार)सुबह साढ़े नौ बजे के बाद नारद पर नई ब्लॉग प्रविष्टियाँ नहीं आ पाईं। (भारतीय समयानुसार)दोपहर साढ़े बारह बजे समस्या को हल कर दिया गया था और तब से नारद पर अपडेट पुनः सही रूप से कार्य कर रहे हैं।

इस तकनीकी समस्या के चलते आप सबको जो कष्ट हुआ उसके लिए खेद है।

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Wednesday, June 13, 2007

बाजार मुद्दे पर राजनीति ना करें।

हमारे कुछ चिट्ठाकार/पत्रकार साथी, बाजार वाले ब्लॉग को हटाए जाने को राजनीति मान रहे है और उसके समर्थन मे अपने ब्लॉग को नारद से हटाने की पचास लाइनों से ऊपर की पोस्ट लिख रहे है, उनसे मेरा विनम्र निवेदन है कि इतनी बड़ी पोस्ट लिखने से अच्छा है, दो लाइनों मे sunonarad at gmail dot com पर लिख भेजें कि हमारा फलां फलां ब्लॉग नारद से हटा दिया जाए। विश्वास कीजिए, आपका भी समय बचेगा, पाठकों का भी और हमारा भी।

अब राजनीति कौन कर रहा है ये जनता स्वयं निर्णय ले।

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Tuesday, June 12, 2007

नारद द्वारा कड़ी कार्यवाही

नारायण! नारायण!
साथियों,
हिन्दी चिट्ठाकारी मे अब वो दोस्ताना माहौल नही रहा। लोग यहाँ पर एक दूसरे के विरुद्द नाम लेकर गाली गलौच करने लगे है। हम किसी चिट्ठाकार का चिट्ठा तो बन्द नही करा सकते लेकिन नारद के माहौल को साफ़ सुथरा रखने के लिए उस चिट्ठाकार का चिट्ठा नारद से हटा सकते है। आज ही हमे एक ऐसा कड़ा फैसला हमे लेना पड़ा है। नारद सलाहकार समिति की संतुति पर "बाजार पर अवैध अतिक्रमण" नाम का चिट्ठा नारद से तुरन्त प्रभाव से हटा दिया है। क्योंकि इस चिट्ठे ने जिस भाषा का प्रयोग किया था वो सर्वथा अनुचित था। अब कड़े फैसले लेने का वक्त आ गया है।

वहाँ पर पंगेबाज के नाम से टिप्पणी करने वाले को भी सावधान किया जाता है कि अपनी भाषा पर नियन्त्रण रखें। बदतमीजी कतई बर्दाश्त नही की जाएगी, चाहे वो कोई भी हो। हम इन्टरनैट पर हिन्दी के प्रचार प्रसार के लिए एक साथ है, लेकिन यदि किसी भी तरह की गलत भाषा सहन नही की जाएगी। आशा है हमारे इस फैसले मे सभी चिट्ठाकार हमारे साथ है।

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Sunday, June 10, 2007

नारद पर पंजीकरण स्थगित

नारायण! नारायण!
भक्तों,
नारद पर नए हिन्दी चिट्ठों का पंजीकरण कुछ समय के लिए (अस्थाई रुप से) स्थगित किया गया है, लगभग एक डेढ महीने के लिए। जुलाई के अन्त मे हम पंजीकरण पुन: शुरु करेंगे। नए चिट्ठाकारों से निवेदन है कि अपना चिट्ठा लगातार लिखते रहे और नारद उवाच को देखते रहे। इस बारे मे सूचना/घोषणा नारद उवाच पर प्रकाशित की जाएगी।

नारद कई बार सभी चिट्ठाकारों से निवेदन कर चुके है कि अपने असक्रिय चिट्ठों के बारे मे हमे बताए, ताकि हम उनको एग्रीगेशन फीड से अलग कर सकें। हम उन चिट्ठों को रेखांकित कर चुके है, लेकिन हम चाहते है कि चिट्ठा लेखक स्वयं आगे आएं और अपने असक्रिय चिट्ठों को नारद के नियमित फीड से हटाने का निवेदन करें। नारद जी, एक सप्ताह तक इन्तज़ार करेंगे और उसके बाद, इस विषय पर उचित निर्णय लेंगे।

नारद आपका अपना वैबस्थल है, इसे प्रचारित करें।

नारायण! नारायण!

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