भक्त रवि रतलामी की पीड़ा और समाधान
नारायण! नारायण!
नारदमुनि को भक्त रवि रतलामी का पत्र मिला है जिसका सार कुछ इस प्रकार है :
हमने विचार विमर्श के बाद उनके सुझाव को मान लिया है। अब नारद तीव्र के फीड में, जिन चिट्ठों की पोस्ट पूरी उपलब्ध होगी, उन सभी चिट्ठों की पोस्ट समरी की जगह पूरी पोस्ट दिखायी जाएगी। जिन चिट्ठों की फीड में पोस्ट सक्षिप्त अवस्था मे उपलब्ध है उनके लिए नारदमुनि कुछ नही कर सकते, क्योंकि ये चिट्ठाकार का अधिकार है कि वो अपने फीड मे पूरी पोस्ट दिखाए अथवा पोस्ट की एक झलक। आशा है अन्य एग्रीगेटर अपने हिसाब से इस विषय पर निर्णय लेंगे।
नारद सबकी सुनते है।
नारद पर अपना विश्वास बनाए रखिए।
नारायण! नारायण!
नारदमुनि को भक्त रवि रतलामी का पत्र मिला है जिसका सार कुछ इस प्रकार है :
आपकी गति अचंभित करने वाली है. बधाई स्वीकारें. परंतु यह गति हमारे जैसे फीड में पढ़ने
वालों के लिए कोई काम की नहीं है. क्या आप अपनी फ़ीड में उन चिट्ठों की पूरी फ़ीड नहीं दे
सकते जो अपनी फीड खुली रखे हुए हैं? तब यह ज्यादा उपयोगी होगा.
हमने विचार विमर्श के बाद उनके सुझाव को मान लिया है। अब नारद तीव्र के फीड में, जिन चिट्ठों की पोस्ट पूरी उपलब्ध होगी, उन सभी चिट्ठों की पोस्ट समरी की जगह पूरी पोस्ट दिखायी जाएगी। जिन चिट्ठों की फीड में पोस्ट सक्षिप्त अवस्था मे उपलब्ध है उनके लिए नारदमुनि कुछ नही कर सकते, क्योंकि ये चिट्ठाकार का अधिकार है कि वो अपने फीड मे पूरी पोस्ट दिखाए अथवा पोस्ट की एक झलक। आशा है अन्य एग्रीगेटर अपने हिसाब से इस विषय पर निर्णय लेंगे।
नारद सबकी सुनते है।
नारद पर अपना विश्वास बनाए रखिए।
नारायण! नारायण!

6 Comments:
धन्यवाद, आपका नारद मुनि. आप सचमुच अपने भक्तों की सुनते हैं. सच्चा ईश्वर वही है जो अपने भक्तों की सुने व गुने!
By
Raviratlami, At
11:02 AM
धन्य हो देव. वैसे जो चिट्ठेकार पुरी फीड देना चाहता है उसके बिच में नारदजी काहे आये? जिन्हे नहीं देनी वह बन्द कर दे. लोकतंत्र वाली बात हुई है, बधाई.
By
संजय बेंगाणी, At
11:33 AM
चिट्ठाकारों के सुझाव पर अमल करने, एवं इसके द्वारा नारद की उपयोगिता को बढाने के लिए आभार -- शास्त्री
हिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरो सकती है.
हर महीने कम से कम एक हिन्दी पुस्तक खरीदें !
मैं और आप नहीं तो क्या विदेशी लोग हिन्दी
लेखकों को प्रोत्साहन देंगे ??
By
शास्त्री जे सी फिलिप्, At
1:10 PM
c/पुरी/पूरी
c/बिच/बीच
By
आलोक, At
1:42 PM
i would be obliged if you could please delete http://rachnapoemsjustlikethat.blogspot.com/
from aggregation .
My blog already has this written on the blog
"Please do not add this blog to HINDI aggregators without written permission of the Author."
i have sent a mail also to this regrds . thanks
By
Rachna Singh, At
4:50 PM
लाख टके की बात है
By
mahashakti, At
1:11 PM
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