नारद उवाच

Wednesday, November 07, 2007

पेश है नारद तीव्र

नारायण! नारायण!

नारदमुनि पुन: प्रस्तुत है, इस बार नारद के तीव्र संस्करण नारद तीव्र के साथ। जैसा कि आपको पता ही होगा कि टीम नारद इस समय नारद के तृतीय संस्करण पर कार्य कर रही है। लेकिन हमने देखा कि नारद की अनुपस्थिति मे भक्त गणों को बहुत कष्ट हो रहा था, इसलिए हम आपके लिए नारद तीव्र लेकर आए है। नारद तीव्र मे बिना तामझाम के चिट्ठों के लेखों का संकलन होगा। सरल, सुगम और सहज संकलन के पूरे पूरे प्रयास किए गए है। एक एग्रीगेटर का प्रथम कार्य होता है चिट्ठों की फीड दिखाना, नारद तीव्र मे यही कार्य हम कर रहे है। इस तीव्र संस्करण कुछ बदलाव है जो इस प्रकार है:
  1. अब ब्लॉग के पंजीकरण की आवश्यकता नही होगी, यदि आपका हिन्दी ब्लॉग है और उसका फीड सार्वजनिक है तो हम उसे यहाँ अवश्य दिखाएंगे।
  2. नारद के दरवाजे सभी प्रकार के चिट्ठों के लिए खुले है, भले ही आप हमारी आलोचना करें अथवा तारीफ़, मन के विचारों पर लिखे या किसी भी विषय पर, हम नारद तीव्र पर उसे अवश्य दिखाएंगे।
  3. नारद तीव्र से ब्लॉग्स को हिन्दी चिट्ठा निर्देशिका पर लिंकित कर दिया गया है, जहाँ पर पंजीकरण करने पर आपको और सुविधाएं मिलेंगी। ज्यादा जानकारी के लिए नारद तीव्र पर अपने चिट्ठे के लिंक पर क्लिक करें।

कुछ और नयी चीजें भी है नारद जी के पिटारे मे, जो धीरे धीरे आपके सामने आएंगी। एक और घोषणा करना चाहते है हम नारद तृतीय संस्करण पर काम कर रहे है, जिसमे अभूतपूर्व फीचर्स होंगे। तब तक आप नारद तीव्र पर आते रहिए और नारद पर अपना विश्वास बनाए रखिए।

आप सभी को दीपावली पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं

नारायण! नारायण!

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2 Comments:

  • मुनिवर ही हर बात निराली... मुनिवर की जय हो! भक्त को नारद की तीव्र सेवा तो जंची ही मगर जो सबसे खूबसूरत लगा है वो है अक्षरग्राम का लोगो... टीम में यह जिसकी भी कल्पना है उसे मेरी ओर से बधाई!

    By Blogger SHASHI SINGH, At 8:42 AM  

  • bahut achchha blog hai. lage rahe.

    By Blogger Vibha Rani, At 3:28 PM  

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