नारद उवाच

Sunday, April 23, 2006

नारद पर नयी सुविधा

भक्तो,
हिन्दी के बढते चिट्ठों की संख्या के चलते, हमने नारद पर एक नया पेज "नये चिट्ठे" शुरु कर दिया है। इस पन्ने पर हम आपको नारद से आकर जुड़े दस नये चिट्ठों का लिंक देंगे। यह लिस्ट अपने आप अपडेट होती रहेगी। इस लिस्ट के आ जाने से नारद उवाच पर नये चिट्ठों की सूचना प्रकाशित नही की जायेगी।

धन्यवाद!

नये हिन्दी चिट्ठों की बाढ

ब्लॉगरों का हिन्दी लेखन के प्रति उत्साह जारी है। नारद की लिस्ट के मुताबिक हम २०० का आँकड़ा पार कर चुके है, इसके अतिरिक्त लगभग 40 और चिट्ठे हिन्दी मे लिखे गये है लेकिन किन्ही कारणोवश हमे उन्हे नारद फीड मे शामिल नही कर रहे। इसका मतलब है कि हम लगभग 250 चिट्ठों तक पहुँचने वाले है, सभी चिट्ठाकारों को बहुत बहुत बधाई। कुछ और नये चिट्ठे सामने आये है ( नये चिट्ठों को हम नारद के फीड पर शामिल कर देंगे, यहाँ नारद उवाच पर स्वागत मे कुछ देरी हो सकती है)

अमित कुलश्रेष्ठ प्रस्तुत कर रहे है पिटारा भानुमती का अमित के शब्दों मे:
अंग्रेजी में अपना चिट्ठा लिखते-लिखते थक गया था. भई, अब बात तो सीधी-साधी है, जब अंग्रेजी में सोचता ही नहीं तो काहे उस बेचारी की टांग तोडूं. खैर, अब देवनागरी लिखने की विद्या का पता लग गया है और समस्या सुलझ गयी है तो देर कैसी? जल्दी ही कुछ सार्थक लिखने का प्रयास करूँगा. और हाँ, विशेष प्रोत्साहन के लिये पुराने और धुरंधर चिट्ठाकार मिश्रा जी को धन्यवाद.


मन्जु गुप्ता और अरविन्द कंसल लाए है हिन्दी और उर्दु की कविताएं
मनोज झा दिल्ली से कह रहे है, मेरी भी सुनो। लेकिन लगता है सुनाते सुनाते खुद ही गायब हो गये है।

अहमदाबाद से प्रदीप शर्मा कहते है कुछ मेरी भी पढिए।
बैंगलौर से विकास पुन्ड्रीक से एक मुलाकात
दिल्ली से अभिरन्जन कुमार का ब्लॉग।
दीपक जैसवाल के रैन्डम एक्सप्रेशन
वर्जीनिया अमरीका से अनुराग का दरिया

इसी तरह से बहुत सारे और हिन्दी ब्लॉग है जो हमारे परिवार मे शामिल होने के लिये एकदम तैयार खड़े है, नारद धीरे धीरे आपका परिचय उनसे कराएंगे। आपको भी यदि किसी हिन्दी ब्लॉग का पता चलता है तो नारद को अवश्य बताइयेगा।

Saturday, April 22, 2006

कुछ नये चिट्ठे

भक्तों
नारद को कुछ और नये हिन्दी चिट्ठों का पता चला है। आइये स्वागत करें:

अंशुल आये है अपनी जिन्दगी नामक चिट्ठे को लेकर इनके शब्दों में:
पिछले हफ्तों में कई आलिमों के चिट्ठे पढे।
मेरा भी खून उबाल मारने लगा, कुछ िलखने को ।
आप लोगों सा काबिल तो हूँ नही, पर फिर भी कुछ कोशिश रहेगी ।


इ-शैडो अपना चिट्ठा छाया लेकर आये हैं।अपने बारे में ये कहते है एक भारतीय यायावर, दुनिय भ्रमण करता हुआ, अप्रवासी।
विमर्श नाम का एक हिन्दी चिट्ठा पाया गया है।शायद नित्यानन्द कटारे जी ने बनाया था।

विनीत अब हिन्दी में भी लिखने लगे है। इनके शब्दों में:
मैंने बचपन से ही हिन्दी और अंग्रेज़ी, यह दोनों भाषाएँ, लगभग साथ-साथ ही सीखी हैं। हिन्दी मेरी मातृ भाषा है। पर जैसे जैसे मैं बड़ा हुआ हूँ, मैंने पाया है कि मेरी बोलचाल की भाषा में दोनों भाषाओं के शब्द कुछ ऐसे घुल मिल गए हैं कि अंग्रेज़ी के शब्दों का प्रयोग किए बिना आज मेरे लिए हिन्दी बोलना असंभव तो शायद नहीं, पर बहुत कठिन अवश्य हो गया है। परिणाम यह है कि मेरी भाषा एक खिचड़ी भाषा बनती जा रही है।


शब्दराज लाए है हिन्दी कविताएं

बसेरा नाम के एक ब्लॉग का पता चला है, लेकिन इसका RSS फीड नही मिल सका है, इसलिये इसे नारद मे नही जोड़ा जा सकता
मुम्बई से गौरव वर्मा अपने ब्लॉग के साथ प्रस्तुत हैं।
नवीन कुमार भी अपने हिन्दी ब्लॉग के साथ प्रस्तुत हैं,इन्होने कविता लिखी है आज होली है।

इसके अतिरिक्त नारद पर कई नये चिट्ठों ने दरख्वास्त दी हुई है, लेकिन या तो उनके फीड मे गड़बड़ थी या उन्होने लिंक देने मे कुछ गलती की है। इसके अतिरिक्त हमने उन चिट्ठों को नारद मे शामिल नही किया है, जिसमे अंग्रेजी चिट्ठे मे एक या दो पोस्ट हिन्दी मे लिखी हुई हों,आशा है वो चिट्ठाकार जल्द ही अपना हिन्दी चिट्ठा हमारे सामने प्रस्तुत करेंगे।इस तरह से हमारा हिन्दी चिट्ठाकारों का परिवार दिन दून और रात चौगुनी की रफ़्तार से बढता जा रहा है। यदि आपको भी किसी हिन्दी चिट्ठे का पता चले तो नारद को अवश्य बताएं।
नारायण! नारायण!

Thursday, April 20, 2006

नये ब्लॉग : स्वागत कीजिए

आज ही नारद पर दो नये चिट्ठों ने शामिल होने की अर्जी दी है। एक है पहेलीबाज, जो अपने पहेली ब्लॉग से आपके ज्ञान की परीक्षा लेंगे। इनके शब्दों में:
यह कोई शाहरूख खान की फ़िल्म नहीं है,आपलोग तो बस केवल फ़िल्में ही देखते हैं।अरे भई, हम यहाँ दिमाग के असली कसरत की बात कर रहे हैं।मेरे एक मित्र ने कहा कि चिट्ठा-जगत में लोग खूब लिख रहे हैं,मगर कुछ ऐसा नहीं है जिससे लोग अपने मस्तिष्क का परिक्षण कर सकें।तो हम उन्हीं मित्र की सलाह से (हमें बकायदा धमकाया भी गया था) पहेली सामने लेकर आये हैं।


दूसरा ब्लॉग है अपने रामलाल जी का सुराज, फ़िल्मकार गुरुदत्त से प्रभावित, रामलाल जी ने इस ब्लॉग द्वारा अपनी कहानियां आपके समक्ष प्रस्तुत करेंगे। उनके शब्दों मे :
कर्नल सिद्धू कि आपबीती सुनकर और सरदार सरोवर बांध पर कि जा रही राजनीति से शुब्द्ध हूँ। कई विचार मन को ओत-प्रोत कर रहे हैं, तीव्र इच्छा है कि इन विचारों को समान धारणा रखने वाले व्यक्तियों तक पहुँचाऊँ निम्नलिखित कहानी इसी विचार को स्वरूप देने का प्रयास है यद्यपि जीवन का अनुभव अभी कम है और हिन्दी भाषा का ज्ञान भी आरंभिक स्तर का है इसलिए त्रुटियों के लिए क्षमा चाहता हूँ। प्रस्तुत लेख कहानी कि पहली कडी है। थोडे बहुत अंतराल के बात नई कडियों जोडता रहूँगा।


स्वागत कीजिए दोनो मित्रों का हिन्दी चिट्ठाजगत है, देखियेगा, स्वागत मे कोई कमी ना रह जाए।

यदि आपको किसी और हिन्दी चिट्ठे का पता चलता है तो नारदमुनि को अवश्य बताएं।

नारायण! नारायण!

Monday, April 17, 2006

सूचना: नारद इ-बुक का पदार्पण

नारायण! नारायण!
भक्तों आप लोगों की सुविधा के लिये हिन्दी चिट्ठाकारों के कुछ चुनिन्दा लेख इबुक फारमेट मे आफ़लाइन पाठन के लिये उपलब्ध हैं। यह लेख हमारे उन पाठकों के लिये बहुत सुविधाजनक होंगे जो हमेशा सफ़र में रहते है, लेकिन कुछ पढने के लिये हिन्दी ढूंढते है। अभी यह लेख पीडीएफ़ फारमेट मे पब्लिश किए जा रहे है, आपकी मांग पर इन्हे दूसरे इबुक फारमेट मे भी उपलब्ध कराया जाएगा।

इन लेखों को संकलित किया है हमारे एक भक्त रजनीश मंगला ने। रजनीश के भागीरथी प्रयास से ही इन लेखो को इबुक फारमेट मे पेश किया जा सका है। इन लेखों के संकलन से सम्बंधित किसी भी प्रकार का पत्राचार रजनीश भाई से ही किया जाए। यदि आप भी इस कार्य मे भागीदारी चाहते है तो नारद मुनि से सम्पर्क किया जा सकता है।

नारायण! नारायण!

Sunday, April 16, 2006

नया ब्लॉग : चिट्ठा ए डिप्पी

आखिर तीन दिनो तक हिन्दी ब्लॉग पढते पढते डिप्पी ने अपना चिट्ठा शुरु कर ही दिया। अब उनके अपने ही शब्दों मे सुनिए
आज तीन दिनों के इंटरनेट छानने के उपरांत लगा कि अब तो खुद का चिट्ठा शुरू करे बिना रहना मुश्किल है। आशा है की मैं अपने पढ़ने वालों को समय समय पर कुछ अच्छा दे पाऊँगा। मात्राऔं की त्रुटियाँ माफ करें, अभी हग पर थोड़ा और अभ्यास करना होगा।


ईस्वामी जी आपका एक और मुरीद बढ गया।
आइये स्वागत करें हमारे इस नये सदस्य का।
नारायण! नारायण!

Saturday, April 08, 2006

नया ब्लॉग :मिसाल

कोटा राजस्थान से आचार्य धीरेन्द्र अपनी मिसाल लेकर पेश हुए हैं। अब गुजरात के बाद राजस्थान के ब्लॉगरों की खेप आई है।कुछ और भी ब्लॉगर है सम्पर्क मे, अपने हिन्दी ब्लॉग को सैटअप कर रहे है।

नारायण! नारायण!

Thursday, April 06, 2006

नये ब्लॉग : स्वागत कीजिए

स्वागत कीजिए हिन्दी मे लिखने वाले नये चिट्ठाकारों का। हमारा परिवार दिन दूनी रात चौगनी की गति से बढता जा रहा है। नये चिट्ठाकार हैं:

भाई जगदीश भाटिया ये हमारे लिए आईना ले कर आएं है।
भाई हितेन्द्र सिंह रायपुर(छत्तीसगढ) से तिरछी नजरिया से अपने विचार प्रकट करेंगे।
अपने भाई रामचन्द्र मिश्र ने अपनी खींची तस्वीरो के लिये अलग से फोटो ब्लॉग शुरु कर दिया है।
आई आई टी रूड़की से भाई दीपक लाए है कुछ हमरी भी। सुनिए इनकी भी।
मानोशी जी ने खबर दी है कि नई हवा बहने लगी है, काफी धाकड़ लोग है यहाँ। लेकिन ये नही समझ मे आया कि गुटबाजी की जरुरत क्यों आन पड़ी।
वाशिंगटन अमरीका से भाई अभिनव की निनाद गाथा पढिए।
अपने कोटा वाले युगल मेहरा ने दो फोटो ब्लॉग शुरु किए है।एक मे वो रिक्वेस्ट कर रहे है देख ले भाई।दूसरे मे वे युगल चित्र कथा पेश कर रहे हैं। युगल भाई ये बात नही समझ मे आई, देख ले भाई तो लिख दिया, बहनों को क्यों भूल गया, या कुछ ऐसा है जो सिर्फ़ भाई देख सकते है। क्यों?

अपने समीर लाल जी उड़नतश्तरी को कौन नही जानता? समीर जी ने मार्च मे ही लेखन शुरु किया था, उनकी उड़नतश्तरी मे आप सवार हुए कि नही? नही हुए तो अभी भी देर नही हुई है, मै तो कहता हूँ लपक लो।

इसके अतिरिक्त जो नये ब्लॉगर मित्र छूट गये है, हमे खबर की जाए।साथ ही यदि आपको किसी नये हिन्दी ब्लॉग का पता चलता है तो हमे जरुर बताएं।

नारायण! नारायण!

अपडेट : दिल्ली से प्रेमलता पान्डेय जी अपने मन की बात कहनी शुरु की है। इन्होने निवेदन किया है इन्हे तकनीकी मदद प्रदान की जाए।

Sunday, April 02, 2006

27 मार्च - 1 अप्रेल :: गुजराती चिट्ठाजगत का हालचाल

27 मार्च:
कार्तिक ने अपने ब्लोग मे अपना अनुभव बताते हुए कहा कि उनके गुजराती ओपरेटिंग सिस्टम "उत्कर्ष" के गुजरातीकरण के दौरान कैसे कैसे मजेदार अनुभव हुए।
धवल ने लयस्तरो मे शेखादम आबुवाला की कविता रखी-
હું નયનનું નીર છુંપ્રેમનું તકદીર છુંખેંચશો - હારી જશોદ્રૌપદીનું ચીર છું

28 मार्च:
कार्तिक ने इंडिक ब्लोगर एवोर्ड के बारे में लिखा. तथा युनिकोड के आगमन से भाषाई क्षैत्र मे हुई प्रगति की तारीफ की। अशोक ने अपने ब्लोग मे चन्द्रकांत बक्षी को श्रद्धांजली दी। धवल ने जगदीष जोशी की कविता रखी-
અણગમતું આયખું લઈ લ્યોને, નાથ !મને મનગમતી સાંજ એક આપો :

इसके अलावा दो नये ब्लोगो के बारे मे भी लिखा : મારા વિચારો, મારી ભાષામાં… तथा પ્રતિદિપ્તિ
सिद्धार्थ ने गुजरात टाईम्स के ई-पेपर के बारे मे लिखा।
29 मार्च:
धवल ने रमेश पारेख की कविता रखी -
ઠેસ રૂપે જોયો, જોયો ઈશ્વરની જેમ પથ્થર કોણે જોયો છે પથ્થરની જેમ ?થાય અહીં એ દુર્ઘટના - કે માણસને

सिद्धार्थ ने दिनोंदिन बढती गुजराती जालस्थलो के बारे मे लिखा. उन्होने दो लिंक भी दी।
વડોદરા કલેક્ટોરેટ
ધરતી વિકાસ મંડળ
30 मार्च:
मौलिक ने अपने ब्लोग मे प्रसिद्ध ऐतेहासिक पात्र गोलियथ का उदाहरण देते हुए कहा कि दुःख और आपत्ति देखने मे बडी ही विकराल लगे पर वास्तव मे छोटी ही होती है, और हम उसे हरा सकते है.
31 मार्च:
विवेक ने अपनी कविता रखी:
હું તો પ્રયત્ન અહીંથી જવાનો કરું છું રોજ
पंकज ने CNG के फायदे बताए.
1 अप्रेल:
विवेक ने गणपत भावसार की कविता रखी-
જ્યારે મમ અંતરમાં કોઈના કરતો મૃદુ વિચાર હૈયાના ખેતરની સીમ


नारायण। नारायण।