अभी कुछ दिन पहले गूगल टाक पर अपने पंकज बैंगानी जी अवतरित हुए, ये कौन है, अरे इन्हे नही जानते? अरे वही स्टिंग आपरेशन वाले,
मन्तव्य के नाम से ब्लॉग है और
तीरकमान वाला ब्लॉग नैटवर्क भी है। नही नही भाई, शिवसेना वाले नही है, बस इन्हे तीर कमान बहुत पसन्द है। वही वाले पंकज भाई। तो भक्तों पंकज भाई अवतरित हुए और हमसे पूछा कि आपने नारद साइट कैसे बनायी, इसके बारे मे कुछ प्रकाश डालें। अब हम चूंकि एक ब्लॉगर है और ब्लॉगिंग को जिन्दगी का एक हिस्सा मान लिया है। यहाँ पर लिखने से इस ज्ञान से कईयों का भला हो जायेगा इसलिये पंकज बैंगानी जी के नारद विवरण को यहाँ पर डाल रहे है।(वैसे कभी कभी मन करता है कि क्यों ना नारद का अपना एक ब्लॉग हो? जैसी हरि इच्छा) खैर...
आवश्यकता तो भक्तों आप सब भी ध्यान से सुने? नारद बनाने का आइडिया कहाँ से आया। आवश्यकता अविष्कार की जननी होती है।नारद कोई नया आइडिया नही था, हमारे हिन्दी चिट्ठों की आधिकारिक साइट
चिट्ठा विश्व तो पहले से ही मौजूद है।
देबू दा, इस साइट को मैनेज करते है (हालांकि आजकल नदारद हैं)। लेकिन परेशानी ये थी, यह साइट फ्री के रिसोर्सेस पर निर्भर थी, इसलिये अपडेट के लिये भी, हमे उसके फ्री वाले सर्वर की कृपा पर निर्भर थे। कहते है दान की बछिया के दाँत नही गिने जाते, इसलिये हम लोग चुपचाप चिट्ठा विश्व को उस सर्वर पर चलाए जा रहे थे। इधर हिन्दी ब्लॉग की संख्या दिनोदिन बढती जा रही थी, भाई लोगों को अपनी ब्लॉग-पोस्ट चिट्ठा विश्व पर नही दिखती थी तो चिन्तित हो उठते थे, दन दना दन, इमेल पर इमेल लिख मारते थे, जैसा तुमने भी व्याकुलता मे किया था। याद है कि नही? खैर...तो फिर आइडिया आया, कि क्यों ना एक नयी हिन्दी ब्लॉग एग्रीगेटर साइट बनाई जाए, तो भैया
ब्लॉगफीडर का जन्म हुआ, इसके लिये हमने
फीड आन फीड साफ़्टवेयर का प्रयोग किया था।ये तो रही जरुरत और शुरुवात की बात।
शुरुवाती समस्याएंब्लॉगफीडर काम तो सही करता था, लेकिन उसका इन्टरफेस बहुत ही दुखी था, अब बदलने को तो काफी कुछ बदला जा सकता था, कोशिश की भी गयी, लेकिन थोड़े ही दिनो मे पता चल गया, कि सिर्फ़ इन्टरफेस ही नही, लगभग 80% साफ़्टवेयर को बदलना पड़ेगा।इधर
मिर्ची सेठ ने
नारद के लिये कार्य प्रारम्भ किया, पहले पहल तो सभी लोगो के आब्जेक्शन उठाया, कि भाई नयी नयी चीजों पर कार्य करो, काहे एक ही टापिक पर कई कई साइट बनाते हो। अंतत: ये निर्णय हुआ कि ब्लॉगफीडर को बन्द किया गया, नारद के समर्थन। ठीक उसी प्रकार, जैसे चुनाव मे उम्मीदवार दूसरे उम्मीदवार के समर्थन मे अपना पर्चा वापस लेते है। फिर एकीकृत रुप से नारद पर कार्य प्रारम्भ हुआ।अब नारद चूंकि
वर्डप्रेस पर चलता था, इसलिये
फीड एग्रीगेटर प्लग-इन ढूंढा गया जो जाकर
फीडवर्डप्रेस पर खत्म हुई। ये प्लग-इन काफी अच्छा है और सही काम करता है, अभी इसका नया वर्जन भी आया है, जिसको हम लोगों ने नारद पर प्रयोग किया है। आइये देखे कि ये फीडप्रेस कैसे काम करता है।
नारद की कार्यप्रणालीफीडवर्डप्रेस वर्डप्रेस का एक प्लग इन है, जो वर्डप्रेस के फ़्रेमवर्क मे काम करता है। आप द्वारा प्रदान किये गये फीड को यह एग्रीग्रेट करता है और सारा मसाला, एक नयी पोस्ट के रुप मे आपके वर्डप्रेस मे डाल देता है। साथ ही जिस साइट से फीड लिया गया है, वहाँ के ब्लॉगर को कन्ट्रीब्यूटर लिस्ट मे डाल देता है।मतलब कि आपको बस अपना फीड का लिंक देना होता है, बाकि ये फीड अपने आप काम करता है।आइये संक्षेप मे बात करे कि कैसे आप एक नारद जैसी साइट बना सकते है:
संक्षेप में- वर्डप्रेस डाउनलोड कीजिये और इन्स्टाल कीजिये।
- फीडप्रेस डाउनलोड कीजिये और प्लग-इन फ़ोल्डर मे डालकर एक्टीवेट कर लीजिये।
- फीडप्रेस की चलाने के लिये कुछ फीड का जुगाड़ कीजिये (जैसे आप चाहते हो, गुजराती ब्लॉग्स)
- फीडप्रेस की अपडेट फीड स्क्रिप्ट को क्रॉन जाब मे डालिये (ताकि नियत समय पर ये अपने आप चले और फीड आटोमेटिक तरीके से अपडेट हो जाएं।
- अपनी साइट के ले-आउट को अपने हिसाब से सजाइयें और संवारिये (आप इसमे पूरी तरह से कुशल और सक्षम है)
बस....हो गया, अब बस इस साइट को मैनेज कीजिये, मतलब गालियां/उलहाने वगैरहा सुनने के लिये तैयार रहिये। लीजिए जनाब आपकी नारद जैसी साइट रेडी हो गयी। किसी भी प्रकार की समस्या आने पर नारद मुनि से सम्पर्क किया जा सकता है।