नारद उवाच

Wednesday, March 29, 2006

नये ब्लॉग : एक शाम मेरे नाम

आइये स्वागत करें मनीष का, उनके ब्लॉग एक शाम मेरे नाम। मनीष का परिचय उनके शब्दों में :

इस तेज रफ्तार जिंदगी की उथल पुथल से दूर चंद लमहे आप सब से बांटने की ख्वाहिश रखता हूँ । मैं यहाँ आऊँगा अपने प्रिय गीतों, गजलों, उपन्यासों, कविताओं और सफर में बीते उन संस्मरणों के साथ जो मुझे एक दूसरी ही दुनिया मेँ खींच ले जाते है और जिन्हें महसूस कर अपने आप को अभिव्यक्त करने की इच्छा बलवती हो जाती है ...



मनीष हिन्दी कविता और कवियों के विषय मे बात कर रहे है। आइये उनके ब्लॉग पर चलकर उनका उत्साहवर्धन करें।

नारायण! नारायण!

Tuesday, March 28, 2006

हिन्दी की खबरें: आनलाइन कवि सम्मेलन

हिंदी साहित्य के क्षेत्र में रविवार की रात एक नई कड़ी उस समय जुड़ गई जब मंचों पर देर रात तक होने वाला कवि सम्मेलन कम्प्यूटर(इन्टरनैट) पर हुआ। इस आन लाइन कवि सम्मेलन में 40 देशों के कवियों ने श्रोताओं को हंसा-हंसा कर लोटपोट कर दिया। इस दौरान कहीं दिन था, कहीं रात तो कहीं भोर हो रही थी। कवि सम्मेलन का संचालन होशंगाबाद के साहित्यकार डा. जगदीश व्योम ने किया।इसमे हमारे हिन्दी चिट्ठाकारों समीरलाल,अनूप भार्गव,पूर्णिमा वर्मन,महेश मूलचंदानी, नित्यगोपाल कटार तथा और भी अन्य कवियों ने बढचढ कर हिस्सा लिया। पूरी खबर यहाँ पढिये

Monday, March 27, 2006

नया चिट्ठा : दस्तक

हैदराबाद,आंध्र प्रदेश से दस्तक दे रहे सागर चन्द नाहर। अपने दिल के दरवाजे खोलकर इनका स्वागत कीजिए भई।

20 मार्च - 26 मार्च :: गुजराती चिट्ठाजगत का हालचाल

पिछ्ले सप्ताह क्या कुछ हुआ गुजराती चिट्ठाजगत में. आइए देखते है:

20 मार्च:

धवलभाई ने अपने ब्लोग “लयस्तरो” में मरीज़ द्वारा रचित कविता “गळतु जाय छे” पोस्ट की. कविता बहुत अच्छी है, और इसकी प्रथम दो पंक्तियो का अनुवाद इस प्रकार है:
मैने तज दिया तेरी तमन्नाओं को,
और इसका ये अंजाम है....
कि अब सचमुच ही लगने लगा है..
कि ये तेरा ही काम है.

21 मार्च:
धवलभाई ने अपने ब्लोग “लयस्तरो” में पथिक परमार द्वारा रचित कविता “तो खरा” पोस्ट की.

22 मार्च:
लयस्तरो में धवल ने राजेन्द्र शुक्ल की एक ग़जल तथा श्रेष्ठ गुजराती साहित्य की एक लिंक पोस्ट की.
मौलिक सोनी ने अपने ब्लोग प्रतिदिप्ती पर वसंत के आगमन तथा उनपर हुए इसके असर के बारे में लिखा.
सिद्धार्थ ने अपने ब्लोग पर वसंत और मोर के बारे में लिखा. साथ ही उसीसे सम्बन्धित रमेश पारेख की कविता भी रखी.

ચોમાસું ચીતરે માળો ઘનઘોરવન હઈએ તો એવું કલ્લોલીએ...અમે આરસના મોર કેમ બોલીએ?

23 मार्च:
यह दिन भगतसिंह की शहादत का दिन है. विवेक ने लयस्तरो में राष्ट्रीय शायर झवेरचन्द मेघाणी की कविता पोस्ट की, जो उन्होने उस शहादत पर लिखी थी.

વીરા મારા ! પાંચ રે સિંધુને સમશાન
રોપાણાં ત્રણ રૂખડાં હો...જી
વીરા ! એની ડાળિયું અડી આસમાન :
મુગતિના ઝરે ફૂલડાં હો...જી

मौलिक ने अपने ब्लोग पर एक गुब्बारेवाले का उदाहरण देते हुए स्पष्ट किया कि व्यक्ति की पहचान गुणो से होती है ना कि रंगरूप से. साथ ही उन्होने दुसरी पोस्ट मे एक श्लोक रखा:

न चोर हार्य न च राज हार्य न भात्रुभाज्यं न च भारकारीव्यंयं
क्रुते वर्धत्ये एवं नित्यं विद्यां धनं सर्वं धनं प्रधानं

यानि की जिसे चुराया ना सके, छीना ना जा सके और जो व्यय करने से बढता है वो धन ज्ञान का धन है.

25 मार्च:
पंकज बेंगाणी ने अपने ब्लोग हाथताली पर एक मुद्दा उठाया कि गुजराती ब्लोगजगत मे ज्यादार चिट्ठाकार सिर्फ कविताएँ ही क्यों रखते हैं. सामाजिक मुद्दे, राष्ट्रीय मुद्दे क्यो नही उठाते? धवल ने उनका समर्थन किया और एक नई पोस्ट लिखी.

विवेक ने अपने ब्लोग पर तुषार शुक्ल की तथा अपनी खुद के द्वारा रची गई कविता पोस्ट की. कुछ पंक्तियों का हिन्दी अनुवाद:

हमारा पुरूषार्थ युँही व्याप्त होता रहेगा.
कार्यशील के चित्त मे यह शांति टिकती नही
जलता है पर यह मलाल थमता नही.

बडी ही सुन्दर रचना....

पंकज ने दुसरे पोस्ट मे तरकश टीम द्वारा हिन्दीनी.कोम के सहयोग से तैयार गुजराती लेखनी टुल का लिंक पोस्ट किया. अब गुजराती लिखना सरल हो गया है.

25 तारिख को सुप्रसिद्ध गुजराती पत्रकार एवं लेखक चन्द्रकांत बक्षी का अहमदाबाद मे दिल का दौरा पडने से दुःखद निधन हो गया. उनके जाने से गुजराती पत्रकारिता को अपूर्णीय क्षति हुई है.

26 मार्च:
विवेक, धवल, कडवे काठियावाडी एवं पंकज ने अपने अपने ब्लोग मे स्व. चन्द्रकांत बक्षी को श्रद्धांजली अर्पित की.
मौलिक ने जल्द ही रिलीज होने वाली एनिमेशन फिल्म “आइस एज 2” के बारे मे लिखा कि यह फिल्म निस्देह बडी ही मजेदार होगी.

नारायण नारायण...

Wednesday, March 22, 2006

नये चिट्ठे:तकनीकी ब्लॉग

स्वागत करिए रवि कामदार के तकनीकी चिट्ठे टेकनोलोजी का तत्वज्ञान का। रवि भाई का पहले से ही हिन्दी ब्लॉग है, ये उनका दूसरा ब्लॉग है। आशा है रवि भाई लगातार लिखते रहेंगे।

अब जहाँ रवि कामदार ने अपना तकनीकी ब्लॉग शुरु किया तो अपने पंकज बैंगानी भी पीछे कहा रहने वाले थे, शुरु हो गये हैं पाठशाला के साथ। पंकज भाई ग्राफिक मे मास्टर है, नारद पर की गयी कलाकारी तो आप देख ही चुके हैं। ये आपको पाठशाला में ग्राफिक्स के गुर सिखाएंगे।

नारायण! नारायण!

Tuesday, March 21, 2006

नारद के लिये चित्र भेजें।

साथियों,
साथियों नारदमुनि को आप सभी के सहयोग की आवश्यकता है। आपने हिन्दी चिट्ठाकारों की साइट नारद के हैडर पर चित्र तो देखें ही होंगे। ये चित्र नारद की शोभा बढाते है।इन चित्रों को आप जैसे ब्लॉगर बन्धुओं के प्रदान किया है। हम चाहंगे कि इस कार्य मे ज्यादा से ज्यादा ब्लॉगर बन्धु सामने आयें। यदि आप भी कोई चित्र नारद को भेजना चाहते हैं आपका स्वागत है। बस इतना ध्यान रखियेगा कि

  • चित्र का साइज 800x140 का हो।
  • चित्र भारत या भारतवासियों से सम्बंधित हो।
  • आप चित्र पर अपने ब्लॉग का नाम/लिंक भी डाल सकते है।
  • चित्र मे दिया गया लिंक व्यवसायिक ना हो।

ये चित्र अपने आप नारद पर आते रहेंगे।इससे दो कार्य होंगे, नारद पर आपकी प्रतिभा दिखेगी और दूसरा आपके ब्लॉग का प्रचार होगा।किसी भी समस्या के आने पर नारद जी सम्पर्क किया जा सकता है।


उदाहरण के लिये इस चित्र को देखिए।




Sunday, March 19, 2006

नारद उवाच अब फारफ़ाक्स समस्या से मुक्त

जैसा कि आलोक भाई ने और मैने भी आपको बताया था कि नारद उवाच दोसौदो तीन सौ इक्यावन वाली बीमारी से प्रभावित है और अभी तक सिर्फ़ बिल्लू के IE में ही चलता है, लेकिन मुझे बताते हुए हर्ष हो रहा है अब इस बिमारी का निराकरण कर लिया गया है और अब यह फायरफाक्स पर भी चलने लगा है।

आप सभी का इस ब्लॉग पर पुन: स्वागत है।
नारायण! नारायण!

Saturday, March 18, 2006

नारद कथा का असर

भक्तो आप सभी को नारद मुनि का आशीर्वाद

भक्तो, नारद के बनाने की कहानी तो आप सुन ही चुके हो, एक भक्त पंकज बैंगानी ने इस कथा से प्रेरणा लेकर गुजराती भाषा के चिट्ठों का संसार सजाया है। मुझे बहुत खुशी है कि नारद के जन्म की कहानी किसी के काम आ सकी। साइट बहुत ही सुन्दर बनी है, यदि आपको गुजराती आती है तो जरुर पढियेगा, नही तो साइट देखियेगा जरुर,बहुत सुन्दर डिजाइन है। यदि आपकी जान पहचान मे कोई मित्र गुज्जू है तो उसे इस साइट के बारे मे जरुर बताइयेगा।

एक भक्त ने नारद उवाच ब्लॉग की जरुरत पर सवाल उठाया था, दरअसल नारद उवाच मात्र आपको नारद साइट की उत्त्पत्ति की कथा सुनाने के लिये नही बनाया गया। नारद उवाच, नारद से सम्बंधित संवाद का एक जरिया होगा, ,साथ ही हिन्दी भाषा से सम्बंधित खबरें पहुँचाने का भी साधन होगा। इसके अतिरिक्त हम अन्य साथियों द्वारा हिन्दी के क्षेत्र मे किये गये प्रयासों को आपके सामने लाने का प्रयास करेंगे।

अभी नारद उवाच ब्लॉग स्पाट पर चल रहा है, जो इसका स्थाई स्थान नही है, इसे जल्द ही हम नारद की साइट पर ले जाने का प्रयास करेंगे।बाकी जैसी हरि इच्छा।

नारायण! नारायण!

Thursday, March 16, 2006

नारद जैसी साइट कैसे बनाएं

अभी कुछ दिन पहले गूगल टाक पर अपने पंकज बैंगानी जी अवतरित हुए, ये कौन है, अरे इन्हे नही जानते? अरे वही स्टिंग आपरेशन वाले, मन्तव्य के नाम से ब्लॉग है और तीरकमान वाला ब्लॉग नैटवर्क भी है। नही नही भाई, शिवसेना वाले नही है, बस इन्हे तीर कमान बहुत पसन्द है। वही वाले पंकज भाई। तो भक्तों पंकज भाई अवतरित हुए और हमसे पूछा कि आपने नारद साइट कैसे बनायी, इसके बारे मे कुछ प्रकाश डालें। अब हम चूंकि एक ब्लॉगर है और ब्लॉगिंग को जिन्दगी का एक हिस्सा मान लिया है। यहाँ पर लिखने से इस ज्ञान से कईयों का भला हो जायेगा इसलिये पंकज बैंगानी जी के नारद विवरण को यहाँ पर डाल रहे है।(वैसे कभी कभी मन करता है कि क्यों ना नारद का अपना एक ब्लॉग हो? जैसी हरि इच्छा) खैर...

आवश्यकता
तो भक्तों आप सब भी ध्यान से सुने? नारद बनाने का आइडिया कहाँ से आया। आवश्यकता अविष्कार की जननी होती है।नारद कोई नया आइडिया नही था, हमारे हिन्दी चिट्ठों की आधिकारिक साइट चिट्ठा विश्व तो पहले से ही मौजूद है।देबू दा, इस साइट को मैनेज करते है (हालांकि आजकल नदारद हैं)। लेकिन परेशानी ये थी, यह साइट फ्री के रिसोर्सेस पर निर्भर थी, इसलिये अपडेट के लिये भी, हमे उसके फ्री वाले सर्वर की कृपा पर निर्भर थे। कहते है दान की बछिया के दाँत नही गिने जाते, इसलिये हम लोग चुपचाप चिट्ठा विश्व को उस सर्वर पर चलाए जा रहे थे। इधर हिन्दी ब्लॉग की संख्या दिनोदिन बढती जा रही थी, भाई लोगों को अपनी ब्लॉग-पोस्ट चिट्ठा विश्व पर नही दिखती थी तो चिन्तित हो उठते थे, दन दना दन, इमेल पर इमेल लिख मारते थे, जैसा तुमने भी व्याकुलता मे किया था। याद है कि नही? खैर...तो फिर आइडिया आया, कि क्यों ना एक नयी हिन्दी ब्लॉग एग्रीगेटर साइट बनाई जाए, तो भैया ब्लॉगफीडर का जन्म हुआ, इसके लिये हमने फीड आन फीड साफ़्टवेयर का प्रयोग किया था।ये तो रही जरुरत और शुरुवात की बात।

शुरुवाती समस्याएं
ब्लॉगफीडर काम तो सही करता था, लेकिन उसका इन्टरफेस बहुत ही दुखी था, अब बदलने को तो काफी कुछ बदला जा सकता था, कोशिश की भी गयी, लेकिन थोड़े ही दिनो मे पता चल गया, कि सिर्फ़ इन्टरफेस ही नही, लगभग 80% साफ़्टवेयर को बदलना पड़ेगा।इधर मिर्ची सेठ ने नारद के लिये कार्य प्रारम्भ किया, पहले पहल तो सभी लोगो के आब्जेक्शन उठाया, कि भाई नयी नयी चीजों पर कार्य करो, काहे एक ही टापिक पर कई कई साइट बनाते हो। अंतत: ये निर्णय हुआ कि ब्लॉगफीडर को बन्द किया गया, नारद के समर्थन। ठीक उसी प्रकार, जैसे चुनाव मे उम्मीदवार दूसरे उम्मीदवार के समर्थन मे अपना पर्चा वापस लेते है। फिर एकीकृत रुप से नारद पर कार्य प्रारम्भ हुआ।अब नारद चूंकि वर्डप्रेस पर चलता था, इसलिये फीड एग्रीगेटर प्लग-इन ढूंढा गया जो जाकर फीडवर्डप्रेस पर खत्म हुई। ये प्लग-इन काफी अच्छा है और सही काम करता है, अभी इसका नया वर्जन भी आया है, जिसको हम लोगों ने नारद पर प्रयोग किया है। आइये देखे कि ये फीडप्रेस कैसे काम करता है।

नारद की कार्यप्रणाली
फीडवर्डप्रेस वर्डप्रेस का एक प्लग इन है, जो वर्डप्रेस के फ़्रेमवर्क मे काम करता है। आप द्वारा प्रदान किये गये फीड को यह एग्रीग्रेट करता है और सारा मसाला, एक नयी पोस्ट के रुप मे आपके वर्डप्रेस मे डाल देता है। साथ ही जिस साइट से फीड लिया गया है, वहाँ के ब्लॉगर को कन्ट्रीब्यूटर लिस्ट मे डाल देता है।मतलब कि आपको बस अपना फीड का लिंक देना होता है, बाकि ये फीड अपने आप काम करता है।आइये संक्षेप मे बात करे कि कैसे आप एक नारद जैसी साइट बना सकते है:संक्षेप में
  1. वर्डप्रेस डाउनलोड कीजिये और इन्स्टाल कीजिये।

  2. फीडप्रेस डाउनलोड कीजिये और प्लग-इन फ़ोल्डर मे डालकर एक्टीवेट कर लीजिये।

  3. फीडप्रेस की चलाने के लिये कुछ फीड का जुगाड़ कीजिये (जैसे आप चाहते हो, गुजराती ब्लॉग्स)

  4. फीडप्रेस की अपडेट फीड स्क्रिप्ट को क्रॉन जाब मे डालिये (ताकि नियत समय पर ये अपने आप चले और फीड आटोमेटिक तरीके से अपडेट हो जाएं।

  5. अपनी साइट के ले-आउट को अपने हिसाब से सजाइयें और संवारिये (आप इसमे पूरी तरह से कुशल और सक्षम है)

बस....हो गया, अब बस इस साइट को मैनेज कीजिये, मतलब गालियां/उलहाने वगैरहा सुनने के लिये तैयार रहिये। लीजिए जनाब आपकी नारद जैसी साइट रेडी हो गयी। किसी भी प्रकार की समस्या आने पर नारद मुनि से सम्पर्क किया जा सकता है।