चौथी अनुगूँजः श्री लालू प्रसाद यादव

चतुर्थ अनुगूँज के आयोजन पर भागीदारी पर यह फटीचर जुमला सटीक रहेगा “अजी ,कमाल हो गया! धोती फाड़ के रूमाल हो गया|” या तो महारथी लोग पूरे घर के बदलने में लगे हैं या फिर लोगो को लालू से कुछ विशेष लगाव नहीं | खैर भारतीय समयानुसार ३० तारीख शुरू हो गई है और कल से मेरी नव वर्ष की छुट्टियाँ प्रारंभ हैं| अतः जिन जिन महानुभावों ने अपनी लेखनी लालूश्री पर चला ली है, आईये नज़र डालते हैं उनके विचारों परः
नये हस्ताक्षर विजय ठाकुर जी ने लालू को उन्ही की भाषा में प्रधानमंत्री बनने तक शऊर सीखने के गुरूमंत्र दे डाले हैं| अगर लालू जी को कोई उनका लेख भेज सके तो भारतभूमि पर बड़ा उपकार होगा|
एक ठो बतिया साफ-साफ बताय दें पहिले तुम बिहार में भंइसी का सींग पकड़ के चढ़ जाता था आ चाहे जो भी आहे-माहे करता था ऊ त ठीक था, पर अब तुम हो गिया है रेल मंतरी अओर ओ भी माननीय रेलमंत्री, अब इहाँ न भंइस है न बिहार बला कादो. ई दिल्ली है भाई, कुछ बदलो सरऊ अपने आप को.
जीतू भाई ने तो लालू यादव पर छोटा मोटा शोध लिख दिया है| हमें आशा थी कि जीतेंद्र भाई की तीक्ष्ण लेखनी की धार से लालू जी के चाल चरित्र और चेहरे पर भरपूर व्यंगात्मक बाण चलेंगे पर उन्होनें लालू यादव के जिंदगी के अनछुए पहलुओं से परिचय कराकर हमें विसमृत कर दिया है|
लालू ने काफी लेख भी लिखे है मुख्यतः राजनीतिक और आर्थिक विषयों पर , उनका शौंक है बड़े बड़े आन्दोलनकारियों की जीवनिया पढना और राजनीतिक चर्चा करना…. संगीत के नाम पर लोकगीत इन्हे बहुत पसन्द है
रवि रतलामी का लेख हो और गजल न हो यह हो ही नही सकता| दुर्घटनाओं को रोकना भगवान विश्वकर्मा के छोड़ने को लेकर क्या खूब खिंचाई की गई है भारतीय रेलमंत्री की|
बारंबार हो रही रेल दुर्घटनाओं को देखते हुए लालू जी अपने अख़बार ‘राजद’ (जो लालू का लालू के लिए लालू के द्वारा है) में फर्माते हैं कि सिर्फ भगवान विश्वकर्मा ही रेल दुर्घटनाओं को रोक सकते हैं. इसके लिए रेल मंत्री बनने के उपरांत उन्होंने भगवान विश्वकर्मा की पूजा की है.
देर आये , दुरुस्त आये| लगता है अनुगूँज की विषयवस्तु से गंभीरता का आवरण हटाने का वार खाली गया| सबने एक से बड़ कर एक जानकारियाँ देने की ठान रखी है| साधुवाद पंकज जी को , यह पत्र भी जितेंद्र की प्रविष्टी की तरह लालू जी तक जरूर पहुँचाना चाहिए|
अंत में ईस खाकसार ने यह ढूढने की कोशिश की है आखिर लालू के करिश्मे में चुंबकीय प्रभाव कैसे पैदा होता है|
अगर किसी को तीस के बाद लालू को लेकर छपास पीड़ा हुई तो मैं समय मिलते ही और नजर पड़ते ही उसको भी यहाँ जोड़ दूँगा| तब तक के लिए अलविदा|
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अनुगूँज यानि सभी चिट्ठाकारों की किसी भी विषय पर सम्मिलित आवाज। अनुगूँज के पाक्षिक आयोजन में आयोजक चिट्ठाकार एक विषय देता है जिस पर सभी भाग लेने वाले चिट्ठाकार अपनी प्रविष्टि लिखते है। जी हाँ कुछ कुछ निबन्ध प्रतियोगिता की तरह, बस इसमे आपको अपनी कलात्मकता (जो नि:सन्देह आपके पास है) का मिश्रण करते हुए अपनी पोस्ट अपने ब्लॉग पर लिखनी है।
अनुगूँज की समाप्ति के अवसर पर आयोजक चिट्ठाकार, सभी प्रविष्टियों का उल्लेख करते हुए एक लेख अक्षरग्राम पर लिखता है। अनुगूँज सम्बंधित नियम 



