अक्षरग्राम अनुगूँजः पहला आयोजन

देबाशीष ने ‘अनुगूँज’ का शंखनाद तो कर ही दिया है। साथ ही मुझे सर्वप्रथम मेज़बानी करने का न्योता दिया, इसके लिये मैं आभार व्यक्त करता हूँ। विषय घोषणा में इस देरी के लिये दो पंक्तियों में स्पष्टिकरण देना चाहुँगाः

प्यार का पहला खत लिखने में वक्त तो लगता है,
नये परिंदों को उड़ने में वक्त तो लगता है।

ब्लॉगिंग के प्रति बढते हुए इस निस्सिम प्रेम को ही मैं ‘अनुगूँज’ के आविर्भाव का कारण मानता हूँ। क्योंकि बढता हुआ प्रेम ही अभिव्यक्ति के नये नये बहाने खोजता है। खुशी है कि “अनुगूँज” नाम भी मेरा ही सुझाया हुआ है। शुभकामनाओं के साथ ही मैं प्रथम आयोजन का आगाज़ करता हूँ।

युवावर्ग में शारीरिक आर्कषण सारी सीमायें लाँघ रहा है। अमेरिकी संस्कृति कि नकल करते करते हम एक अजीब से दोराहे पर आ पहुँचे हैं। आलम ये है कि विश्व के दरोगा के यहाँ चुनावों में भी वोटरों की सँख्या बढ़ाने के लिए सेक्स का सहारा लिया जा रहा है। मेड्रिड मास्टर्स टेनिस में बॉल बालाओं की जगह अब मॉडल्स ले चुकी हैं। हमारे यहाँ “काँटा लगा” विडियो क्रांति के बाद अब बोल्ड फिल्मों की क्रांति चल पड़ी है। कुल मिलाकर देखा जाए तो ये नश्वर काया अब सफलता की सीढ़ी बन गई है। इसी से जुड़ा है इस बार की “अनुगूँज” का विषयः‘क्या देह ही है सब कुछ?’

भाग लेने के कुछ नियमः

  • आयोजन तिथिः १ नवंबर, २००४
  • नीरव को प्रविष्टि भेजने की अंतिम तिथिः २९ अक्तुबर से पूर्व (नीरव का ई-मेल पता है nirav26 @ gmail . com)
  • प्रविष्टि को टेक्स्ट फाईल में युनिकोड एनकोडिंग के साथ सेव कर भेज सकते है अथवा प्रविष्टि की लिंक भी भेज सकते है। ध्यान रहे कि प्रविष्टि प्रकाशन की तिथि १ नवंबर है, अगर आप उसके पहले यह प्रकाशित कर देंगे तो मज़ा खराब हो जायेगा।
  • प्रविष्टि दिये गये विषय पर ही होनी चाहिये, अपनी प्रविष्टि २९ अक्तुबर तक नीरव को ई-मेल से भेजें तथा १ नवंबर को अपने ही ब्लॉग पर प्रकाशित भी करें। १ नवंबर को ही प्रकाशन जरूरी है क्योंकि उद्देश्य यही है कि सभी भाग लेने वाले चिठ्ठाकार एक ही दिन, एक ही विषय पर, अपनी राय का सामुहिक प्रकाशन करें।
  • प्रविष्टि के साथ ‘अनुगूँज’ का लोगो Akshargram Anugunjअवश्य लगायें, साथ ही उल्लेख करें ‘अक्षरग्राम अनुगूँज: पहला आयोजन’

आशा है आप भाग लेकर इस आन्दोलन को सुदृढ़ करेंगे।

4 Responses to “अक्षरग्राम अनुगूँजः पहला आयोजन”

  1. ी — पंकज @ 6:50 pm

    भई वैसे तो पिछले अनुगूँज की तिथि निकल चुकी है पर चिट् […]

  2. […] त हुई थी बहुत मासूम से लगते सवाल से-क्या देह ही सब कुछ है? एक खास विषय।इसके ब […]

  3. […] अपडेट - देबाशीष जी ने ईमेल द्मारा बताया कि अनुगूँज का पहला आयोजन किए हुए एक वर्ष पूरा हो गया है। अनूगूंज का शंखनाद हुआ था पहली नवम्बर को धीर गंभीर विषय “क्या देह ही है सब कुछ?” के साथ। इसलिए यह आयोजन अनुगूँज का वर्षगाँठ विशेष के रूप में आयोजित किया जा रहा है। बढ़चढ़ कर भाग लीजिए। देबाशीष जी के सौजन्य से चुनाव द्मारा पहली चुनी गई प्रविष्टि को मैं भी बना मिनिस्टर की प्रति पुरुस्कार स्वरुप दी जाएगी। कृप्या नोट करें पुस्तक केवल भारत में ही डाक द्मारा भेजी जा सकती है। […]

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